मेष लग्न कुण्डली में रोगों का विश्लेषण

मेष लग्न कुण्डली में छठा (6th) भाव के स्वामी बुध देव हैं जो लग्नेश मंगल के अति शत्रु है l मेष लग्न वाले जातक को बुध का पन्ना कभी भी धारण नहीं करना चाहिए l अगर कोई जातक धारण करता है तो उसका रोग बढ़ने का योग बन जाता है l सभी मेष लग्न वाले …

मेष लग्न कुण्डली में रोगों का विश्लेषण Read More »

रोग – विश्लेषण: रोग होने के कारण क्या है ?

आधुनिक समय के भाग – दौड़ एवं वयस्तता भरे जीवन मे प्रत्येक मनुष्य अपनी आकांछाओं और धन – प्राप्ति के पीछे ऐसा वयस्त है कि वह पूर्णतः अपने खान – पान, रहन-सहन और जीवन शैली पर सही ध्यान नहीं दे पता l इसलिए हर मनुष्य अपने स्वास्थय – सम्बन्धी छोटी-छोटी परेशनियों से भी साथ – साथ  …

रोग – विश्लेषण: रोग होने के कारण क्या है ? Read More »

कार्तिक मास का जन्म शुभ या अशुभ ?

कार्तिक मास का मतलब यह होता है कि इस महीने में सूर्य देव तुला राशि अर्थात नीच राशि में भ्रमण कर रहे होते हैं l इसलिए इस मास में जन्मे जातकों के लिए यह मास अशुभ माना जाता है l क्यूंकि सारे ग्रह सूर्यदेव से रोशनी लेते हैं l अगर सूर्यदेव नीच राशि में आ …

कार्तिक मास का जन्म शुभ या अशुभ ? Read More »

रत्न विज्ञान – रत्नों की सम्पूर्ण जानकारी

रत्न पहनने का अर्थ यह है कि जिस ग्रह का रत्न धारण किया जाता है उस ग्रह की किरणों का शरीर में बढ़ाना I रत्न हमेशा योग कारक और सम ग्रह का पहना जाता है जब वो अच्छे फल देने में सक्षम न हो I यदि योग कारक ग्रह कुण्डली में सूर्य से अस्त हो …

रत्न विज्ञान – रत्नों की सम्पूर्ण जानकारी Read More »

शनि देव की ढैय्या कैसे देखें तथा उपाय?

शनि देव की ढैया (2½  साल): जब गोचर के शनिदेव का भ्रमण लग्न कुण्डली के चन्द्रमा से चतुर्थ भाव में आ जाए तो इसे शनिदेव का ढैया कहते है l जब गोचर के शनिदेव का भ्रमण लग्न कुण्डली के चन्द्रमा से अष्ठम भाव में आ जाए तो वह भी शनिदेव का ढैया कहलाता है l …

शनि देव की ढैय्या कैसे देखें तथा उपाय? Read More »

शनि देव की साढ़ेसाती कैसे देखें तथा उपाय?

साढ़ेसाती का अर्थ होता है 7½  साल I शनिदेव का एक राशि में भ्रमण 2½ साल का होता है  इसलिए तीनों राशियों का कुल समय 2½  + 2½  + 2½  = 7½ साल हुआ I ज्यादातर साढ़ेसाती बुरी ही होती है और उसके प्रभाव अशुभ होते हैं परन्तु कुण्डली में शनि देव अगर योग कारक …

शनि देव की साढ़ेसाती कैसे देखें तथा उपाय? Read More »

ग्रहों का अंश तथा षड़बल

जिस तरह इन्सान दो पांवो पर चलता है उसी प्रकार षडबल और अंशमात्र बलाबल के अनुसार ही ग्रह अपना फल देता है l दोनों में से एक के बल में भी यदि कमी आ जाती है तो उनके फल में कमी आ जाती है l जैसे एक रेलगाड़ी दो पटरियों पर चलती है वैसे ही …

ग्रहों का अंश तथा षड़बल Read More »

ज्योतिष के महत्वपूर्ण सिद्धांत

योग करक ग्रह की परिभाषा : योग करक ग्रह कुण्डली में अच्छे घर का मालिक होता है l यह ग्रह जहाँ बैठता है, जहाँ देखता है और जहाँ जाता है उन घरों की वृद्धि करता है I एक योग कारक ग्रह भी मारक (शत्रु) बन सकता है I यदि योग कारक ग्रह उदय अवस्था में …

ज्योतिष के महत्वपूर्ण सिद्धांत Read More »

ग्रहों की दृष्टियों का क्या महत्त्व है ?

ज्योतिष विद्या में ग्रहों की दृष्टि का अर्थ उस ग्रह का प्रभाव दूसरे भावों पर पड़ना होता है जैसे कि एक टॉर्च एक जगह पर चलती है उसकी रौशनी या किरणें दूसरी जगह पर पड़ती हैं l उसी प्रकार ग्रह अगर एक भाव में बैठा हो तो उसका असर दूसरे भावों पर भी पड़ता है …

ग्रहों की दृष्टियों का क्या महत्त्व है ? Read More »

वक्रीय (Retrograde) तथा अस्त (Combust) गृह का क्या अर्थ है ?

सभी ग्रह अपनी चाल चलते – चलते वक्रीय होते हैं परन्तु इस बात को सदैव स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य और चन्द्रमा कभी भी वक्रीय नहीं होते हैं l ये सदैव मार्गीय चलते हैं (इसीलिए बीता हुआ समय कभी भी वापस लौटकर नहीं आता है l) वक्रीय ग्रह का सही अर्थ : जब भी कुण्डली …

वक्रीय (Retrograde) तथा अस्त (Combust) गृह का क्या अर्थ है ? Read More »

Scroll to Top