शुभ कात्तर योग & पाप कात्तर योग

शुभ कात्तर योग: बहुत कुण्डलियों में कुण्डली का पापी और मारक ग्रह होते हुए भी अपनी दशा या अन्तर्दशा में अशुभ फल नहीं देता जिसका कारण शुभ कात्तर योग होता है I Definition : यदि किसी भी पापी और क्रूर ग्रह के दोनों तरफ शुभ ग्रह बैठ जाएँ तो वह ग्रह शुभ-कात्तर योग में होने …

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कामकाज के लिए ग्रहों के कारकेत्व

1. सूर्य (सरकार का प्रतीक) : रचनाकार, मालिक, चिकित्सिक, सरकारी ठेकेदारी, कमीशन, लकड़ी का काम, डॉक्टर, न्यायधीश, शाही या सरकारी नियुक्ति, प्रशासनिक कार्य, जंगल का अफसर, अध्यापन, दवाइयों का कार्य, बैंक अफसर, राजनीतिज्ञ, आदि I 2. चन्द्रमा (कामकाज का प्रतीक) : मानसिक कार्य, तरल पदार्थों सम्बन्धी कार्य, आन्दोलन, नमक, समुद्र और बदलाव, यात्री और नाविक, …

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कुण्डली के अनुसार इष्ट देव

पंचम भाव का स्वामी ही आपका इष्ट देव होता है I इष्ट देव की पूजा – अर्चना करना हमेशा शुभ फलदायक होती है I Learn Astrology From E-Book: 1. मेष लग्न की कुण्डली के जातक के इष्ट देव – मेष लग्न की कुंडली में पंचम भाव में सिंह राशि आती है I सिंह राशि के …

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मांगलिक योग देखने में 95% ज्योतिषी गलती क्यों करते हैं ?

मांगलिक योग : सर्वप्रथम यह जानना आवश्यक है कि ‘मांगलिक’ का सही अर्थ क्या है और यह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है l वास्तव में किसी भी कुण्डली में ‘मांगलिक’ एक दोष नहीं है अपितु योग माना जाता है l परन्तु बहुत से ज्योतिषी ‘मांगलिक दोष’ कहकर लोगों के मनों को डर और …

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मीन लग्न और मांगलिक योग

1. प्रथम भाव में मंगल : मीन लग्न की कुण्डली में यदि मंगल देवता लग्न में विराजमान हों तो जातक मांगलिक नहीं होता है क्यूंकि यहाँ पर मंगल ग्रह कुण्डली के योगकारक ग्रह हैं जिसकी सातवें भाव पर पड़ रही सातवीं दृष्टि जातक को खुशहाल और स्वस्थ वैवाहिक जीवन जीने में सहायता करती है I …

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कुम्भ लग्न और मांगलिक योग

1. प्रथम भाव में मंगल : कुम्भ लग्न की कुण्डली में यदि मंगल देवता लग्न में विराजमान हों तो जातक मांगलिक होता है I इस कुण्डली में मंगल ग्रह एक कारक ग्रह नहीं है इसलिए इसकी सातवीं दृष्टि वैवाहिक जीवन में परेशानी पैदा करेगी I Learn Astrology in just 7 – 10 days : 2. …

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मकर लग्न और मांगलिक योग

1. प्रथम भाव में मंगल : मकर लग्न की कुण्डली में यदि मंगल देवता लग्न में विराजमान हों तो जातक मांगलिक नहीं होता है क्यूंकि यहाँ मंगल ग्रह उच्च के होते हैं I उच्च राशि को कोई भी ग्रह त्रिकोण या केंद्र में स्थित हो तो बुरा न करने के लिए बाध्य होता है I …

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धनु लग्न और मांगलिक योग

1. प्रथम भाव में मंगल : धनु लग्न की कुण्डली में यदि मंगल देवता लग्न में विराजमान हों तो जातक मांगलिक नहीं होता है क्यूंकि यहाँ पर मंगल ग्रह त्रिकोण का स्वामी, लग्नेश बृहस्पति का मित्र, होने के कारण अति योगकारक ग्रह हैं जिसकी सातवें भाव पर पड़ रही सातवीं दृष्टि जातक को खुशहाल और …

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वृश्चिक लग्न और मांगलिक योग

1. प्रथम भाव में मंगल : वृश्चिक लग्न की कुण्डली में यदि मंगल देवता लग्न में विराजमान हों तो जातक मांगलिक नहीं माना जाता है क्यूंकि लग्न में स्वः राशि पड़ा मंगल रुचक नामक पंचमहापुरुष योग बनाता है I अति योगकारक मंगल ग्रह की सातवीं दृष्टि वैवाहिक जीवन में खुशहाली एवं सम्पन्नता लाती है I …

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तुला लग्न और मांगलिक योग

1. प्रथम भाव में मंगल : तुला लग्न की कुण्डली में यदि मंगल देवता लग्न में विराजमान हों तो जातक मांगलिक नहीं माना जाता है क्यूंकि मंगल ग्रह की सातवीं दृष्टि उसके अपने भाव (सातवें भाव) पर पड़ती है I पराशर थ्योरी के अनुसार कोई भी ग्रह अपने भाव का बुरा नहीं करता है I …

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